"ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते । सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते ॥"
विषयों का निरंतर चिंतन करने से उनमें आसक्ति उत्पन्न होती है, आसक्ति से कामना और कामना में बाधा आने पर क्रोध उत्पन्न होता है।
[श्रीमद्भगवद्गीता २.६२]🎯
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24 Aug 2026
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